समरसता को प्रभावित करने वाले कानूनों पर चर्चा हेतु आयोजित गोष्ठी संपन्न
समरसता को प्रभावित करने वाले कानूनों पर चर्चा हेतु आयोजित गोष्ठी संपन्न।
अखिलभारतीय समानता मंच उत्तराखंड द्वारा श्रीनगर (गढ़वाल) में आयोजित विचार गोष्ठी श्रीनगर बद्रीनाथ मार्ग पर एक वेडिंग सेंटर में आयोजित की गई। उक्त गोष्ठी में समरसता , आरक्षण व्यवस्था , एट्रोसिटी एक्ट, यूजीसी समानता रेगुलेशन 2026 आदि संवेदनशील विषयों पर समाज के बुद्धिजीवी, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुड़े लोगों , कार्यरत कार्मिकों एवं सेवानिवृत्त अधिकारी/ कर्मचारियों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
विचार गोष्ठी में विभिन्न राज्यों में राजकीय सेवाओं में आरक्षण सीमा बढ़ाने की लगी होड़ पर चिंता व्यक्त करते हुए इसकी समीक्षा की मांग की गई ।
कहा गया कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देशों जिसमें आरक्षण की अधिकतम सीमा 50% तक सीमित किए जाने एवं आरक्षण में क्रीमी लेयर को हटाने की बात कही गई थी, किंतु सरकार द्वारा तुष्टिकरण के तहत उक्त निर्देशों को नकार दिया गया।
एट्रोसिटी एक्ट में फर्जी शिकायतों की बढ़ती संख्या को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संज्ञान लेते हुए शिकायत की जांच के बाद ही गिरफ्तारी किए जाने के निर्देशों के बावजूद सरकार ने इस एक्ट में संविधान संशोधित कर उत्पीड़न संबंधी कई और कठोर प्राविधान जोड़ दिए गए।
यूजीसी समानता रेगुलेटर2026 में सामान्य वर्ग के छात्रों को जन्मजात अपराधी मानते हुए उन्हें अपने बचाव में कुछ भी कहने के अधिकार से भी वंचित कर दिया गयाहै , शिकायत कर्ता की शिकायत झूठी होने पर भी उसके विरुद्ध कोई कार्यवाही किए जाने का प्राविधान नहीं है।

स्वाभाविक तौर पर इसका सीधा असर उच्च शिक्षा ले रहे सामान्य श्रेणी के छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा।
भविष्य में एट्रोसिटी एक्ट की तरह इसके दुरूपयोग की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया जा सकता है ।
बैठक में मुख्यवक्ता अखिल भारतीय समानता मंच के राष्ट्रीय महा सचिव इंजी. वी.पी. नौटियाल ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि मंच पूरे देश में समाज की समरसता को प्रभावित करने वाले कानूनों के विरुद्ध संघर्ष कर रहा है।
उन्होंने कहा कि मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष इंजी. एम.नागराज की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय ने वर्ष २००६ में राजकीय सेवाओं में पदोन्नतियों में आरक्षण दिए जाने के लिए तीन शर्ते रखी जाने का निर्णय दिया था, जिसके तहत विभिन्न राज्यो में मा उच्च न्यायालय द्वारा पदोन्नति में आरक्षण पर रोक लगा दिए जाने के बावजूद भी दस दस / बारह बारह सालों से वहाँ की सरकारें सामान्य वर्ग के ख़िलाफ़ मा. सुप्रीम कोर्ट में इस रोक को हटाने के लिए आम आदमी के टैक्स के करोड़ों रुपया ख़र्च कर रही है तथा इन राज्यों के सामान्य वर्ग के सैकड़ों कर्मी बिना पद्दोन्नत्ती के सेवानिवृत्त हो चुके हैं ।
उत्तराखंड राज्य के परिपेक्ष्य में उन्होंने कहा कि विधानसभा सीटों के परिसीमन में पर्वतीय जनपदों में जनसंख्या के आधार से अधिक भौगोलिक क्षेत्रफल को ध्यान में रखे जाने को बहुत अहम बताया
उत्तराखंड का अधिकतम क्षेत्रफल अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगा होने के कारण सामरिक दृष्टि से बहुत ही संवेदनशील क्षेत्र है और अब इन क्षेत्रों में पलायन भी बहुत ज्यादा हो चुका है ऐसे में इसके प्रतिनिधित्व को बढ़ाया जाना राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रिवर्स पलायन के लिए बहुत उपयोगी साबित होगा ।

कहा कि पर्वतीय राज्य की मांग के पीछे मूल उद्देश्य उत्तराखंड की मूल संस्कृति को बचाते हुए क्षेत्रीय विकास ही था।
यदि पर्वतीय जनपदों में जनसंख्या आधारित परिसीमन हुआ तो पलायन की मार झेल रहे इन जनपदों का प्रतिनिधित्व विधान सभा में कम हो जाएगा। जिससे भविष्य में होने वाले विकास कार्य तो प्रभावित होंगे ही पलायन में भी वृद्धि होगी ।
हाल ही में कश्मीर में हुए परिसीमन में भी क्षेत्रफल को आधार माना गया है ।
विचार गोष्ठी में उपस्थित उत्तराखंड समानता पार्टी के जनपद पौड़ी के अध्यक्ष विक्रम सिंह राणा ने अवगत कराया कि वर्ष 2022 में समाज के विभिन्न संगठनों , बुद्धिजीवियों , सेवानिवृत्त अधिकारी एवं कर्मचारियों व्यापक दबाव एवं विचार विमर्श के बाद डिप्लोमा इंजी. महासंघ के पूर्व में अध्यक्ष रह चुके इंजी.नवीन चंद्र कांडपाल के नेतृत्व में इस पार्टी का गठन किया गया था ।
वर्ष 2023 में चुनाव आयोग ने इसे क्षेत्रीय पार्टी के रूप में पंजीकृत किया।
वर्तमान में पूर्व भारतीय वन सेवा के अधिकारी एवं त्रिपुरा सरकार के प्रधान सचिव रह चुके डॉ. वी.के.बहुगुणा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं ।

उत्तराखंड समानता पार्टी अखिल भारतीय समानता मंच द्वार उठाए गए मुद्दों पर सहमत होते हुए इसके राजनीतिक रूप से हल किए जाने हेतु कार्य कर रही है उत्तराखण्ड के पर्वतीय जनपदों में परिसीमन में भौगोलिक क्षेत्रफल को भी आधार बनाए जाने हेतु पार्टी विभिन् नमंचो पर आवाज उठा रही है । 16 दिसंबर 2024 को देहरादून में रैली निकालकर एवं ज्ञापनों के माध्यम से संबंधितों तक अपनी आवाज पहुंचा चुकी है ।
दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस वे के लोकार्पण के अवसर पर भी पार्टी ने देहरादून के प्रमुख स्थानों पर पोस्टर चस्पा कर परिसीमन एवं यूजीसी वापस लो की मांग पर प्रधानमंत्री जी का ध्यान आकृष्ट करने का कार्य किया है।
उन्होंने आमजन से पार्टी से जुड़ने का आव्हान किया, अ.भा.समानता मंच के प्रांतीय कार्यकारणी के सदस्य अजय सिंह बिष्ट द्वारा अपने संबोधन में समाज में वैमनस्यता पैदा करने वाले कानूनों में सुधार हेतु सामाजिक न्यायिक एवं राजनीतिक रूप से संघर्ष कर सुधार करवाया जा सकता है ।
विचार गोष्ठी में श्रीमती उमा घिल्डियाल , राकेश सिंह , गंगा प्रसाद पोखरियाल, दिनेश विष्ट ,प्रीति खंडूरी ,आर.पी. कप्रवान,दुर्गा प्रसाद लखेड़ा, देवानंद बहुगुणा ,सुबोध कुमार खंडूरी,ललित मोहन सिंह, तेजपाल सिंह नेगी , रमेश सिंह चौहान, धर्मेंद्र सिंह रावत , रमेश चंद्र चमोली , प्रदीप बहुगुणा एवं अखिल भारतीय समानता मंच के गढ़वाल मंडल के संयोजक सीता राम पोखरियाल आदि सम्मिलित थे।
मंच के प्रदेश अध्यक्ष वी.के.धस्माना ने विचार गोष्ठी में प्रतिभाग करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त करते हुए गोष्ठी में व्यक्त विचारों एवं समाधान उपायों को आमजनों तक पहुँचाने की अपील की।
प्रांतीय अध्यक्ष अखिल भारतीय समानता मंच उत्तराखंड।
