Fri. Apr 17th, 2026

हरदा ने अर्जित अवकाश तरबूज, खरबूजा, ककड़ी मंडवे की रोटी लाल चावल की पार्टी दें खोला का पहाड़ी व्यंजन के तड़के से क़िया सबका स्वागत 

हरदा ने अर्जित अवकाश तरबूज, खरबूजा, ककड़ी मंडवे की रोटी लाल चावल की पार्टी दें खोला का पहाड़ी व्यंजन के तड़के से क़िया सबका स्वागत

 

 

देहरादून 17 अप्रैल 2026

पूर्व मुख्यमंत्री एं हरीश रावत ने आज देहरादून में मौसमी फलों के संग के तहत अपने उत्तराखण्ड़ के उत्पादों के प्रचार की मुहिम को आगे बढ़ाया है आज अपने आवास डिफेन्स कॉलोनी में उन्होने मौसमी फलों व खाद्य पदार्थों के प्रोत्साहन पर कार्यक्रम आयोजित किया जिसमें बुराश का जूस, नींबू का जूस, तरबूज, खरबूजा, खीरा, जौनसार की टमाटर की चटनी, भट्ट की चूड़कानी, लाल भात, हरिद्वार के गुड़ आदि के स्वाद का लुफ्त कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जमकर भागीदारी की की हरदा के आवास मे जगह भी कम पड़ गयी।कार्यक्रम मे विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक, से जुड़े लोगो ने जमकर उठाया।

कार्यक्रम में बोलते हुए पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यह मेरा एक गैर राजनीतिक कार्यक्रम है मैं जब मुख्यमंत्री था तब भी राज्य के उत्पाद व संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिये मैं काम करता था अब भी मैं अपने इस एजेण्ड़े को कोई भी सरकार रहे उसके फोक्स से बाहर नही जाने दूंगा। उन्होने कहा कि मेरे प्रयास रहेंगे कि हमारे उत्तराखण्ड़ के वंयजन व उत्पाद राष्ट्रीय व अर्न्तराष्ट्रीय पहचान बनाई ।

उन्होंने कहाँ कि ज़ब कांग्रेस सरकार थी तब मैंने छोटी छोटी पहल कि थी उत्तराखंड कि संस्कृति, परंपरा, परिधान, व्यंजन व उत्तराखंड के अन्य उत्पात को बढ़ावा देने के कई योजनाए आरम्भ की थी और मेरा संकल्प है कि उत्तराखण्डीयत के एजेंडे को फोकस से बाहर नहीं जाने दूंगा

उन्होंने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि हमारे झंगोरे की खीर ने राष्ट्रपति भवन तक अपनी पहुॅच बनाई है व अभी और इस कार्य को आगे बढ़ाना है वही कार्यक्रम मे स्वतंत्रता सैनानी उत्तराधिकारी संगठन के अवदेश पंत, सत्यप्रकाश चौहान, प्रेम सिंह दानू ने चरखा भेट कर उनका स्वागत क़िया।

कार्यक्रम में पहुॅचे लोगो को पूर्व मुख्यमंत्री ने आगे बढ़कर मेजबानी करते हुए स्वंय अपने हाथों से परोसा। कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक व ट्रेड़ यूनियन से जुड़े सैकड़ो लोगो ने बढ़चढ़ कर भागीदारी की।

इस अवसर पर सैड़को कांग्रेस कार्यकर्ताओ सहित विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े लोगो ने बढ़ चढ़ कर भागीदारी की उनके आवास पर जगह भी कम पड़ गयी

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