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कम उम्र में भी बढ़ रही आर्थराइटिस की समस्या, नियमित योग और व्यायाम से रखें जोड़ों को स्वस्थ

हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी बीमारियां अब उम्रदराज लोगों तक ही सीमित नहीं रह गई हैं। बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों में कमी और घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने की आदत के कारण युवाओं में भी जोड़ों के दर्द और आर्थराइटिस की समस्याएं देखने को मिल रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित शारीरिक गतिविधियां और संतुलित दिनचर्या अपनाकर जोड़ों की कार्यक्षमता बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि योग और व्यायाम को जीवनशैली का हिस्सा बनाना केवल हड्डियों के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी है। नियमित शारीरिक गतिविधियों से मांसपेशियों को मजबूती मिलती है और जोड़ों की गतिशीलता बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है। इसके लिए उम्र की कोई बाध्यता नहीं है, युवा और बुजुर्ग दोनों अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम शुरू कर सकते हैं।

वॉकिंग और साइकिलिंग से मिल सकता है फायदा

जोड़ों को सक्रिय और शरीर को फिट रखने के लिए रोजाना पैदल चलना, साइकिल चलाना और तैराकी जैसे अभ्यास उपयोगी माने जाते हैं। ये गतिविधियां शरीर की मांसपेशियों को सक्रिय रखने के साथ रक्त संचार बेहतर बनाने में भी सहायक होती हैं। नियमित व्यायाम से मोटापा, डायबिटीज और हृदय रोग जैसी समस्याओं के जोखिम को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।

एरोबिक एक्सरसाइज भी है फायदेमंद

तेज गति से पैदल चलना, साइकिलिंग, तैराकी और डांसिंग जैसी गतिविधियां एरोबिक व्यायाम के अंतर्गत आती हैं। इन अभ्यासों से शरीर की सहनशक्ति बढ़ाने, मांसपेशियों को मजबूत बनाने और शारीरिक सक्रियता बनाए रखने में मदद मिलती है। गठिया से पीड़ित लोगों के लिए भी अपनी क्षमता के अनुसार कम प्रभाव वाले एरोबिक अभ्यास उपयोगी हो सकते हैं।

घर पर इन योगासनों का कर सकते हैं अभ्यास

अगर किसी कारण से जिम जाना संभव नहीं है तो घर पर भी कुछ योगासन किए जा सकते हैं। ये शरीर की लचक और मांसपेशियों की मजबूती बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

  • सेतुबंधासन (ब्रिज पोज): इस योगासन से कमर, पीठ और पैरों की मांसपेशियों को मजबूती मिल सकती है। यह शरीर के निचले हिस्से को सक्रिय रखने में सहायक है।

  • वीरभद्रासन (वॉरियर पोज): यह आसन पैरों, कंधों और शरीर की अन्य प्रमुख मांसपेशियों को सक्रिय करने में मदद करता है।

  • फॉरवर्ड फोल्ड: इस अभ्यास से शरीर की लचक बढ़ाने और मांसपेशियों में खिंचाव लाने में मदद मिल सकती है।

  • प्लैंक पोज: यह पेट, पीठ और शरीर के मुख्य हिस्से की मांसपेशियों को मजबूत बनाने वाला अभ्यास है।

  • धनुरासन: इस योग मुद्रा से पीठ और शरीर के पिछले हिस्से की मांसपेशियों में खिंचाव आता है।

नियमितता और सावधानी है जरूरी

हड्डियों और जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए केवल कभी-कभार व्यायाम करना पर्याप्त नहीं है। इसे रोजमर्रा की आदत बनाना जरूरी है। हालांकि, जिन लोगों को पहले से गठिया, जोड़ों में तेज दर्द या हड्डियों से जुड़ी समस्या है, उन्हें अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार डॉक्टर या योग विशेषज्ञ की सलाह लेकर ही अभ्यास करना चाहिए। दर्द बढ़ने पर व्यायाम रोक देना चाहिए।

सक्रिय जीवनशैली, नियमित योग और संतुलित दिनचर्या अपनाकर लंबे समय तक जोड़ों की गतिशीलता और शारीरिक फिटनेस बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

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