देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय में “ग्लोबल फ्रंटियर्स इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित
देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय में “ग्लोबल फ्रंटियर्स इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान आयोजित
देहरादून, 10 मार्च 2026।
देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय, देहरादून में 10 मार्च 2026 को “ग्लोबल फ्रंटियर्स इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” विषय पर एक महत्वपूर्ण विशेषज्ञ व्याख्यान (Expert Talk) का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों और विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक परिदृश्य, नवीनतम संभावनाओं तथा शिक्षा क्षेत्र में इसके प्रभावी उपयोग के बारे में जागरूक करना था। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में अमेरिका के बोस्टन स्थित मेट्रोपॉलिटन कॉलेज, बोस्टन यूनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर श्री विजय कनाबर ने अपने अनुभवों से सभी को रूबरू कराया।
कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) अजय कुमार द्वारा मुख्य अतिथि का स्वागत कर की गई। अपने स्वागत संबोधन में कुलपति प्रो. अजय कुमार ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों, उत्कृष्ट शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, अनुसंधान गतिविधियों, विभिन्न परियोजनाओं में प्राप्त अनुदानों तथा विद्यार्थियों के शानदार प्लेसमेंट रिकॉर्ड के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय निरंतर आधुनिक तकनीकों को शिक्षा प्रणाली में शामिल कर छात्रों को वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार कर रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि आज के डिजिटल युग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक क्रांतिकारी तकनीक के रूप में उभर रही है, जो शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और प्रशासन जैसे लगभग हर क्षेत्र में परिवर्तन ला रही है। ऐसे में विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे छात्रों और शिक्षकों को नई तकनीकों से परिचित कराते हुए उन्हें भविष्य के लिए सक्षम बनाएं।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर डॉ. आर. के. त्रिपाठी और डॉ. ऋतिका मेहरा भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के डीन, विभागाध्यक्ष तथा बड़ी संख्या में शिक्षकगण भी मौजूद रहे।
अपने व्याख्यान में मुख्य वक्ता श्री विजय कनाबर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक विकास, इसके वर्तमान परिदृश्य और भविष्य की संभावनाओं पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आज दुनिया भर के विश्वविद्यालय और शोध संस्थान एआई के माध्यम से शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी, इंटरैक्टिव और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शिक्षा के हर पहलू को प्रभावित कर रही है। एआई आधारित टूल्स और प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षक छात्रों की सीखने की गति, उनकी रुचियों और आवश्यकताओं के अनुसार पाठ्य सामग्री तैयार कर सकते हैं। इससे शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया अधिक व्यक्तिगत और प्रभावी बनती है।

श्री कनाबर ने यह भी बताया कि एआई की सहायता से स्मार्ट क्लासरूम, वर्चुअल लैब्स, डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म और ऑटोमेटेड असेसमेंट सिस्टम विकसित किए जा सकते हैं, जिससे शिक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ती है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके शिक्षक विद्यार्थियों को जटिल विषयों को भी सरल और रोचक तरीके से समझा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एआई आधारित तकनीकें शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन लाएंगी। इसलिए शिक्षकों और विद्यार्थियों को इन तकनीकों को समझना और इनके साथ स्वयं को अनुकूलित करना अत्यंत आवश्यक है।

व्याख्यान के दौरान उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार एआई रिसर्च, डेटा विश्लेषण, कंटेंट क्रिएशन और शिक्षा के प्रशासनिक कार्यों को भी अधिक सुगम बना सकता है। उन्होंने विश्वविद्यालयों से आह्वान किया कि वे अपने पाठ्यक्रम और शिक्षण पद्धति में एआई आधारित नवाचारों को शामिल करें, ताकि छात्र भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो सकें।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित शिक्षकों और विभागाध्यक्षों ने भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विभिन्न पहलुओं पर प्रश्न पूछे, जिनका श्री कनाबर ने विस्तार से उत्तर दिया। इस संवादात्मक सत्र ने कार्यक्रम को और अधिक ज्ञानवर्धक बना दिया।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न स्कूलों के डीन, विभागाध्यक्ष तथा बड़ी संख्या में शिक्षकगण उपस्थित रहे। सभी ने इस व्याख्यान को अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक बताया तथा भविष्य में भी ऐसे ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों के आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।

कार्यक्रम के अंत में अतिथि वक्ता का आभार व्यक्त करते हुए विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डाक्टर आर के त्रिपाठी ने कहा कि इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों के साथ संवाद से शिक्षकों और विद्यार्थियों को वैश्विक दृष्टिकोण प्राप्त होता है तथा शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने में सहायता मिलती है।
इस प्रकार “ग्लोबल फ्रंटियर्स इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस” विषय पर आयोजित यह विशेषज्ञ व्याख्यान विश्वविद्यालय के शिक्षकों के लिए अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायक साबित हुआ तथा सभी प्रतिभागियों ने इससे नई जानकारी और दृष्टिकोण प्राप्त किया।
