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डा. नरपिंदर बने यूनेस्को टीडब्ल्यूएएस के फेलो, एआई के मानकीकरण व नैतिकता पर कार्यशाला

डा. नरपिंदर बने यूनेस्को टीडब्ल्यूएएस के फेलो

 

देहरादून , 09 अक्टूबर । ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कुलपति डा. नरपिंदर सिंह को यूनेस्को की द वर्ल्ड एकेडमी ऑफ साइंसेज़ का फेलो चुना गया। यह सम्मान विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान और विकासशील देशों में वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए प्रदान किया गया है।

टीडब्ल्यूएएस एक अंतरराष्ट्रीय विज्ञान अकादमी है। इसका उद्देश्य विकासशील देशों में वैज्ञानिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करना, सहयोग बढ़ाना और वैज्ञानिक क्षमता का निर्माण करना है। टीडब्ल्यूएएस उन वैज्ञानिकों को सम्मानित करती है जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद अपने शोध और नवाचार से विज्ञान को समाज की प्रगति के उपकरण के रूप में स्थापित किया।

 

डा. नरपिंदर सिंह का पिछले तीन दशकों में फूड केमिस्ट्री, सीरियल साइंस और बायोपॉलीमर अनुसंधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनके शोध कार्यों ने स्टार्च, डाइटरी फाइबर और फंक्शनल फूड कंपोनेंट्स की संरचना और उनके औद्योगिक उपयोग की समझ को नई दिशा दी। हाल ही में उन्होंने एग्रीकल्चर, फिशरीज़ एंड फॉरेस्ट्री तथा फूड साइंस श्रेणियों में भारत में प्रथम स्थान प्राप्त किया। डा. सिंह विश्व स्तर पर इन क्षेत्रों में शीर्ष 50 वैज्ञानिकों में शामिल रहे।

 

इस उपलब्धि पर अपनी भावना व्यक्त करते हुए डा. नरपिंदर सिंह ने कहा कि टीडब्ल्यूएएस फेलो के रूप में चयन उनके लिए अत्यंत गर्व और सम्मान का क्षण है। उन्होंने इस उपलब्धि को अपने विद्यार्थियों, शोध सहयोगियों और सहकर्मियों के समर्पण, सहयोग और निरंतर प्रयासों का परिणाम बताया। डा. सिंह ने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान उनके शोध कार्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण की सार्थकता का प्रतीक है, जो विकासशील देशों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को नई दिशा और प्रेरणा देने के उनके संकल्प को और सुदृढ़ करेगा।

 

एआई के मानकीकरण व नैतिकता पर कार्यशाला

देहरादून, 9 अक्टूबर। ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में मानकीकरण के प्रयास पर कार्यशाला की गई।
कार्यक्रम में कुलपति डा. नरपिंदर सिंह ने मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि एआई इंसानों की जगह नहीं लेगा बल्कि विकास की नई राहें खोलेगा। उन्होंने छात्र-छात्राओं से आह्वान किया कि वह ग्राफिक एरा के आईओएस सेंटर का भरपूर उपयोग करें। डा. सिंह ने कहा कि यह सेंटर एनवीआईडीआईए – जीपीयू तकनीक से सुसज्जित है और प्रारंभिक स्तर पर छात्र-छात्राओं को एक मजबूत एआई वातावरण देने की दिशा में कार्य कर रहा है।
बीआईएस देहरादून के निर्देशक श्री सौरभ तिवारी ने कहा कि एआई की भूमिका मनुष्य की सहायता करने की है। एआई का मूल सिद्धांत सीखना, सोचना और निर्णय लेकर परिणाम देना है। उन्होंने छात्र-छात्राओं से नए विचारों को अपनाने की अपेक्षा जताई।
इस अवसर पर डीडीजी स्टैंडर्डाइजेशन बीआईएस डा. रीना गर्ग ने कहा बीआईएस छात्र-छात्राओं को मानकों और यूनिवर्सिटी से संबंधित पहलुओं को समझने में मदद करता है। राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मानकीकरण- संगति, सटीकता और स्पष्ट संचार सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम का आयोजन बीआईएस सीएसई स्टूडेंट चैप्टर और कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में आईओएस सेंटर के हेड डा. सचिन घई, कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के हेड डा. देवेश प्रताप सिंह समेत शिक्षक-शिक्षिकाएं और छात्र-छात्राएं शामिल रहे।

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