Thu. Mar 19th, 2026

शेयर बाजार में डूबे ₹12 लाख करोड़

मुंबई – मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में कोहराम मचा दिया। दलाल स्ट्रीट पर मची इस भगदड़ में निवेशकों के लगभग ₹12 लाख करोड़ एक ही दिन में स्वाहा हो गए। सेंसेक्स और निफ्टी में 3.3 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे पिछले तीन दिनों की बढ़त पूरी तरह खत्म हो गई। बीएसई (BSE) में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार मूल्य ₹439 लाख करोड़ से घटकर ₹427 लाख करोड़ रह गया।

बाजार की गिरावट: मुख्य आंकड़े

30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 2,496 अंक गिरकर 74,207 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 775 अंक टूटकर 23,002 के स्तर पर आ गया। बाजार का रुख इतना नकारात्मक था कि सेंसेक्स के सभी 30 शेयर लाल निशान में बंद हुए। बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसे दिग्गजों में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई। निफ्टी में ओएनजीसी (ONGC) एकमात्र ऐसा शेयर रहा जो बढ़त के साथ बंद हुआ, क्योंकि तेल की कीमतें बढ़ने से उसे लाभ होने की उम्मीद है।

ऊर्जा संकट: $111 पर पहुंचा तेल

बाजार में डर का मुख्य कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक तेजी है। खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा केंद्रों पर हमलों की खबरों के बाद ब्रेंट क्रूड $111.4 प्रति बैरल तक पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जहां से दुनिया के 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति होती है, फिलहाल बंद है। ईरान की धमकियों ने आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक तेल आयात करता है, इसलिए ऊंची कीमतें सीधे तौर पर महंगाई और राजकोषीय घाटे को बढ़ा सकती हैं।

विशेषज्ञों की राय

एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर. ने कहा: “कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया है। ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों ने आपूर्ति संबंधी चिंताओं को उस स्तर पर पहुंचा दिया है जो हमने वर्षों में नहीं देखा। जब तक समुद्री मार्गों पर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी।”

बैंकिंग सेक्टर और विदेशी निवेशकों की निकासी

बैंकिंग क्षेत्र पर इस गिरावट का सबसे बुरा असर पड़ा। एचडीएफसी बैंक में 5 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई, जबकि एक्सिस और आईसीआईसीआई बैंक भी 3 प्रतिशत से ज्यादा टूटे। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली ने आग में घी का काम किया है। आंकड़ों के अनुसार, इस महीने के मात्र 12 कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने ₹77,214 करोड़ की निकासी की है।

जापान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया सहित अन्य एशियाई बाजारों में भी गिरावट का रुख रहा। भारतीय निवेशकों के लिए अब सबकी नजरें निफ्टी के 23,000 के स्तर पर टिकी हैं। यदि मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता है, तो आने वाले दिनों में बाजार और भी नीचे गिर सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *